[ Hindi ]आरक्षण की राजनीति मे शनि की भूमिका

पुनः आरक्षण का नया विवाद चल निकल पड़ा हैइसकी शुरुआत कहाँ से हुई ये जानते है

भारत में पहली बार जॉब में रिजर्वेशन 1902 में इम्प्लीमेंट हुआ था. गैर-ब्राह्मण और पिछड़े वर्गों के पक्ष में आरक्षण शुरू किया गया था
तब शनि का गोचर मकर में चल रहा था
1932 जून 1932 के गोलमेज सम्मेलन से एक महत्वपूर्ण बात सामने आई, जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने प्रस्ताव रखा, जिसके अनुसार मुसलमानों, सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन, के लिए अलग से प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाना था। इन्हे निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव के लिए कई सीटों को सौंपा गया था जिसमें वे केवल वोट दे सकते थे, हालांकि वे अन्य सीटों पर भी मतदान कर सकते थे। यह प्रस्ताव विवादास्पद था: महात्मा गांधी ने इसके विरोध में उपवास किया लेकिन उनके नेता बी आर अम्बेडकर सहित कई वर्गों ने इसका समर्थन किया। वार्ता के बाद, गांधी ने  हिंदू मतदाता होने के लिए अंबेडकर के साथ एक समझौता किया, जिसमें दलितों के लिए सीटें आरक्षित थीं। इस्लाम और सिख धर्म जैसे अन्य धर्मों के चुनाव अलग-अलग रहे। इसे पूना पैक्ट के रूप में जाना जाता है।
उस समय भी शनि का गोचर मकर राशि में चल रहा था
1947


1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद एसटी, एससी के पक्ष में और 1980 के बाद ओबीसी के पक्ष में कुछ बड़ी पहलें हुईं। (अन्य पिछड़ी जातियां) देश का सकारात्मक कार्रवाई कार्यक्रम 1950 में शुरू किया गया था .
स्वत्रंत भारत के चार्ट में बृषभ् राशि का उदय हुआ हे नवम एव दशम भाव का स्वामी शनि है जोकि अपने स्वामी से दृस्ट है जब भी शनि का गोचर नवम भाव से होता हे आरक्षण में और बढोतरी हो जाती हे अब ये सबको बराबरी के दर्जा देने के मौका मिले उसके बजाये वोट बैंक बन गया हे जिसे हम आगे शनि के गोचर से समझेंगे.
1954
1954 में, शिक्षा मंत्रालय ने सुझाव दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत स्थानों को आरक्षित किया जाना चाहिए, जहां कहीं भी आवश्यक हो, प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता अंक 5 प्रतिशत तक छूट देने का प्रावधान है। 1982 में, यह निर्दिष्ट किया गया था कि सार्वजनिक क्षेत्र और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में क्रमशः 15 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत रिक्तियां एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित की जानी चाहिए।
शनि अपनी उच्च राशि तुला में था
1978 1978 में एक महत्वपूर्ण बदलाव शुरू हुआ जब सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का आकलन करने के लिए मंडल आयोग की स्थापना की गई। [1978] आयोग के पास ओबीसी के लिए सटीक जनसंख्या के आंकड़े नहीं थे और इसलिए उसने 1931 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया, इस प्रकार समूह की जनसंख्या का 52 प्रतिशत हो गया। [8] 1980 में आयोग की रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि 27 प्रतिशत के ओबीसी के लिए आरक्षित कोटा केंद्र सरकार द्वारा संचालित सेवाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के निकायों के संबंध में लागू होना चाहिए। इसने उच्च शिक्षा के संस्थानों में प्रवेश के लिए एक समान परिवर्तन के लिए बुलाया, जहां राज्यों को छोड़कर पहले से ही अधिक उदार आवश्यकताएं थीं। यह 1990 के दशक तक नहीं था कि सिफारिशों को केंद्र सरकार की नौकरियों में लागू किया गया था।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 1992 में फैसला सुनाया कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है, इसके ऊपर जो कुछ भी न्याय करता है वह संविधान द्वारा गारंटीकृत समान पहुंच का उल्लंघन करेगा। इस प्रकार इसने आरक्षण पर एक लिए घेरा लगा दी।  हालांकि, ऐसे राज्य कानून हैं जो इस 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक हैं और ये सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमेबाजी के अधीन हैं। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु राज्य में, जाति-आधारित आरक्षण 69 प्रतिशत है और लगभग 87 प्रतिशत आबादी पर लागू होता है।
1990 में आरक्षण के खिलाफ लोगों ने बिद्रोह किया तब शनि धनु के आखरी नवमांसा में गोचर कर रहा था ,मकर राशि में प्रवेश करने वाला था तब राम जन्म भूमि विवाद ने आरक्षण के मुददे को दबा दिया।
महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा द्वारा 9 मार्च 2010 को 186 सदस्यों के बहुमत से और 1 के विरुद्ध मत द्वारा पारित किया गया था। मार्च 2013 तक, लोकसभा ने बिल पर मतदान नहीं किया है। आलोचकों का कहना है कि लिंग को आरक्षण के आधार के रूप में नहीं रखा जा सकता है क्योंकि अन्य कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिए। शिक्षित महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करते समय विशेष रूप से महिला उम्मीदवार की आर्थिक, सामाजिक स्थिति। पहले से मौजूद आरक्षण जैसे ओबीसी, एससी / एसटी, शारीरिक रूप से विकलांग आदि में भी महिला आरक्षण की मांग बढ़ रही है। कुछ समूहों की अभी भी मांग है कि महिलाओं के लिए आरक्षण कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए क्योंकि उनमें 50 प्रतिशत आबादी शामिल है। जरूरत है]
तब शनि तुला राशि में राहु के साथ गोचर कर रहा था
अब शनि का गोचर धनु में चल रहा हे और पुनः आरक्षण का नया विवाद चल निकल पड़ा है, अब शनि का गोचर धनु में चल रहा हे और पुनः आरक्षण का नया विवाद चल निकल पड़ा है इस बार हिन्दू नव बर्ष कुंडली में गुरु शनि केतु एक साथ धनु राशि में हे जोकि एक नय परिवर्तन की ओर संकेत दे रहे हे, २०२० में पुनः शनि मकर राशि में आएगा गुरु भी शनि के साथ युति बनाएगा शनि गुरु की युति समाज में एक परिवर्तन लाती है, आगे के 50 बर्षो में भी देश से आरक्षण की समाप्ति नहीं होगी लग्न में स्तिथ राहु समाज में व्याप्त पाखंड को दर्शाता है देश का हित बाद में स्वय का पहले, आरक्षण से संबंधित नए कानून भी बन सकते हैं.